जिंदगी से सब कुछ गवां कर आज मैं तन्हा बैठा हूँ
पाने की तलाश किसको है यहां तो सब कुछ खो के बैठा हूं
कौन हैं करीब मेरे इस बात की कैसी फिक्र करूं
जब हर किसी के दिल से बेघर हो चुका हूं मैं
लोग तो आते जाते रहेंगे अब तन्हा जो बैठा हूं
आखों में आसूं भरी है चेहरे की मुस्कान खो बैठा हूं
तेरे दर्द से निजात मिले ना मिले मैं अपने जख्मों से लिपट बैठा हूं
बैर थी खुशियों को मेरी खुशी से इसलिए सब खुशी को
कुर्बान करके मैं दर्द से दोस्ती कर के बैठा