क़ैद-ऐ-दिल से आज़ाद करोगे, लिख देता हूं
तुम मुझको बर्बाद करोगे, लिख देता हूं
साथ रक़ीबो के जाओगे मुझे बेवफ़ा बताओगे
ये सब मेरे बाद करोगे, लिख देता हूं
तेरी उन सूनी गलियों में नज़र नहीं जब आऊंगा
मिलने की फरियाद करोगे, लिख देता हूं
मेरी लिखी हुई कविताएं जब भी पढ़ने बैठोगे
पढ़कर मुझको याद करोगे, लिख देता हूं
– भारत मौर्या