मुझे तुम बिन ये सब अधूरे से लगते हैं

 

  मुझे तुम बिन ये सब अधूरे से लगते हैं

  ये राहे, ये गलियाँ ये हँसी , ये ठिठुलियाँ 

  मुझे तुम बिन ये सब अधूरे से लगते हैं..!! 

  ये ढलते शाम, ये पंछियों  की चहचाहट 

  ये समुंदर की लहरे ,ये ऋतु का बदलना 

  मुझे तुम बिन ये सब अधूरे से लगते हैं..

!! 

 

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